Mar 01, 2026

उत्तराखंड के 1792 गांवों की वीरानगी दूर करने की कवायद, जनगणना निदेशालय 25 अप्रैल से जुटाएगा मकानों का रिकॉर्ड

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देहरादून। उत्तराखंड में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में पहले चरण के तहत 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक मकान सूचीकरण एवं गणना का व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के हर घर, हर ढांचे और हर संरचना का विवरण दर्ज किया जाएगा। खास बात यह है कि सैकड़ों वीरान गांवों जिन्हें ‘घोस्ट विलेज’ कहा जाता है में भी गणना की प्रक्रिया पूरी गंभीरता से लागू की जाएगी। यदि किसी मकान में पूरे एक महीने तक कोई नहीं मिलता है, तो उसे ‘लॉक्ड’ श्रेणी में दर्ज कर दिया जाएगा। राज्य सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद जनगणना कार्य निदेशालय ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि डिजिटल माध्यम से सटीक और पारदर्शी तरीके से डेटा संग्रह किया जा सके। 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक स्वगणना की प्रक्रिया भी शुरू होगी, जिसके तहत लोग स्वयं भी अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।

प्रदेशभर में मकान सूचीकरण के लिए लगभग 30 हजार गणना ब्लॉक बनाए गए हैं। प्रत्येक गणना ब्लॉक में अधिकतम 800 की जनसंख्या का मानक तय किया गया है। हर ब्लॉक के लिए एक इन्यूमेरेटर (गणनाकर्मी) नियुक्त किया जाएगा, जो अपने क्षेत्र का नक्शा तैयार करेगा। इस नक्शे में मकान, दुकान, मंदिर, कुआं, ट्यूबवेल और अन्य संरचनाओं को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद गणनाकर्मी घर-घर जाकर मकानों की नंबरिंग करेंगे और वहां रहने वाले लोगों से 33 प्रश्नों के उत्तर एकत्र करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से मौके पर ही अपलोड की जाएगी, जिससे डेटा की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित हो सके। उत्तराखंड में पलायन एक गंभीर समस्या बना हुआ है। ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 1792 गांव ‘घोस्ट विलेज’ की श्रेणी में आ चुके हैं। इनमें सबसे अधिक 331 गांव पौड़ी गढ़वाल जिले में हैं। इसके अलावा 105 गांव अल्मोड़ा, 76 गांव चमोली, 73 गांव बागेश्वर और 94 गांव हरिद्वार जिले में शामिल हैं। ये सभी गांव राजस्व ग्राम हैं, लेकिन इनमें स्थायी आबादी नहीं बची है। ऐसे गांवों में मकान तो मौजूद हैं, लेकिन लोग नहीं। यही कारण है कि जनगणना कार्य निदेशालय के सामने इन क्षेत्रों में वास्तविक स्थिति दर्ज करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। जनगणना निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि यदि गणना अवधि के दौरान किसी मकान पर ताला लगा मिलता है और पूरे एक महीने तक वहां कोई जानकारी देने वाला नहीं मिलता, तो उसे ‘हाउस ऑफ यूज’ कैटेगरी के तहत ‘वैकेंट’ और सब-कैटेगरी ‘लॉक्ड’ में दर्ज किया जाएगा। हालांकि ऐसे मकानों की भी नंबरिंग की जाएगी और संरचना का विवरण दर्ज होगा। यदि किसी गांव के सभी मकान लॉक्ड पाए जाते हैं, तो उस गांव की जनसंख्या शून्य दर्ज की जाएगी। बावजूद इसके, मकान सूचीकरण की पूरी प्रक्रिया वहां भी लागू होगी। चार्ज ऑफिसर्स संबंधित क्षेत्रों के नक्शे उपलब्ध कराएंगे और सुपरवाइजर व इन्यूमेरेटर मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे। मकान सूचीकरण और संरचना गणना के बाद फरवरी 2027 में जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें वास्तविक जनसंख्या की गणना की जाएगी। यदि किसी घोस्ट विलेज में उस समय कोई परिवार निवास करता पाया जाता है, तो उसकी जनसंख्या दर्ज की जाएगी। राज्य सरकार लगातार रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है, ताकि वीरान होते गांव फिर से आबाद हो सकें। जनगणना का यह चरण न केवल आंकड़ों का संकलन होगा, बल्कि यह राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे की वास्तविक तस्वीर भी सामने लाएगा। 25 अप्रैल से शुरू हो रही यह मकान गणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उत्तराखंड के बदलते जनसांख्यिकीय परिदृश्य का आईना साबित होगी। खासकर घोस्ट विलेज की सच्चाई सामने आने के बाद भविष्य की नीतियों और योजनाओं की दिशा तय करने में यह आंकड़े अहम भूमिका निभाएंगे।