May 25, 2026

2030 तक आधुनिक पंचायत भवन बनने से उत्तराखंड में ग्रामीण शासन व्यवस्था होगी और बेहतर

post-img

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य की ग्रामीण स्वायत्तता और ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट की हालिया बैठक में पंचायतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पंचायत घरों के निर्माण की धनराशि को दोगुना करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। सरकार के इस निर्णय से राज्य में पिछले दो वर्षों से धन की कमी के कारण रुके हुए निर्माण कार्यों में नई जान फूंकी जाएगी।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पहले प्रति पंचायत भवन के निर्माण के लिए 10 लाख रुपये आवंटित किए जा रहे थे, जो वर्तमान निर्माण लागत और भौगोलिक चुनौतियों के लिहाज से बेहद कम साबित हो रहे थे। धनराशि बढ़ने से अब हर साल राज्य में 487 नए पंचायत घरों का निर्माण संभव हो सकेगा। पंचायतीराज विभाग का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक प्रदेश में कुल 1953 पंचायत भवनों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए। वर्तमान में उत्तराखंड की 7817 ग्राम पंचायतों में से 819 पंचायतें ऐसी हैं जिनके पास अपना भवन तक नहीं है। इसके अतिरिक्त, 1134 भवन अत्यंत क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं, जिन्हें फिर से बनाया जाना अनिवार्य है। विशेष सचिव पंचायतीराज, डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि वर्तमान में 5867 पंचायत भवन ही क्रियाशील स्थिति में हैं, जबकि 1370 को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। सरकार का संकल्प है कि अगले चार वर्षों के भीतर हर ग्राम पंचायत का अपना आधुनिक और मजबूत भवन हो। पंचायत भवन केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की धुरी होते हैं। अपना भवन होने से ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर होगा, डिजिटल सेवाएं सुलभ होंगी और ग्रामीणों को अपने कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। 382 ग्राम पंचायतों के पास पहले से भूमि उपलब्ध है, जहां बजट आवंटन के साथ ही निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। धामी सरकार का यह निर्णय 'अंत्योदय' की भावना को चरितार्थ करता है। बुनियादी सुविधाओं को सुदूर गांवों तक पहुँचाने और पंचायतों को 'स्मार्ट विलेज' की दिशा में ले जाने के लिए यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा। इस कदम से न केवल ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र की जड़ें भी और गहरी होंगी।