Jun 23, 2026

स्थानीय पर्यटन केंद्रों को खतरनाक अदृश्य आग के खतरों से बचाने के लिए गहन सतर्कता अभियान का उत्तराखंड गृह विभाग ने किया समर्थन

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में आग लगने की संभावित घटनाओं को रोकने और जनहानि को पूरी तरह शून्य करने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रदेश के सभी सरकारी, गैर-सरकारी और निजी भवनों में अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक 'फायर सेफ्टी ऑडिट' कराने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। सचिवालय में हुई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने साफ किया कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी विभागीय सचिवों और जिलाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय होने के आदेश दिए हैं। इस अभियान के तहत विशेष रूप से ऊंची इमारतों, अत्यधिक भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्रों, संकरी व तंग गलियों में स्थित भवनों और ऐसे परिसरों को चिन्हित किया जाएगा जहां आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के सुरक्षित रास्ते (निकासी मार्ग) उपलब्ध नहीं हैं। मुख्य सचिव के आदेश के अनुसार, राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में सबसे संवेदनशील भवनों और घने इलाकों का खुद स्थलीय निरीक्षण (ग्राउंड जीरो पर जाकर जांच) करेंगे। इस विशेष सर्वे का मुख्य उद्देश्य उन सभी कमियों को समय रहते पकड़ना है जो किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। प्रशासनिक स्तर पर इस अभियान को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमों का गठन किया जा रहा है, जो अग्नि शमन विभाग के साथ मिलकर रिपोर्ट तैयार करेंगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक में स्पष्ट गाइडलाइन जारी करते हुए कहा राज्यव्यापी विशेष सर्वे के पूरा होते ही जहां कहीं भी अग्नि सुरक्षा मानकों में कमियां पाई जाएंगी, वहां संबंधित भवन स्वामियों या प्रभारियों को तुरंत मानकों को पूरा करना होगा। सुरक्षा नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। आग जैसी भयानक घटनाओं से जन-धन की हानि को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए सभी अधिकारी पूरी मुस्तैदी से इस अभियान को धरातल पर उतारें। राज्य के सभी छोटे-बड़े सरकारी कार्यालय, निजी व्यावसायिक प्रतिष्ठान, मॉल, अस्पताल और आवासीय बहुमंजिला इमारतें। तंग गलियां, संकरे बाजार, बिना इमरजेंसी एग्जिट (निकासी रास्ते) वाले परिसर और ऊंचे कॉम्प्लेक्स। मानकों की अनदेखी करने वाले और फायर एनओसी न लेने वाले भवनों के खिलाफ होगी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई। इस बड़े फैसले के बाद अब उत्तराखंड के सभी जनपदों में सुरक्षा नियमों को लेकर प्रशासन का कड़ा रुख देखने को मिलेगा, जिससे भविष्य में आगजनी के खतरों से जनता को सुरक्षित रखा जा सके।