May 30, 2026

उत्तराखंड ने 24 महीनों के भीतर सौर दक्षता और उत्पादन में दस गुना वृद्धि का नया मानदंड स्थापित किया

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उत्तराखंड में हरित क्रांति और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई और स्वर्णिम इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में 'काउंसिल ऑन एनर्जी, इन्वायरमेन्ट एण्ड वॉटर' द्वारा तैयार की गई ‘सौर जागरूकता स्मारिका पुस्तिका’ का भव्य विमोचन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल एक पुस्तिका का विमोचन मात्र नहीं है, बल्कि यह देवभूमि उत्तराखंड के उज्ज्वल, आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में हमारे सामूहिक संकल्प और अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने वैश्विक चिंताओं का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज), ऊर्जा संकट और गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे दौर में सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) अब केवल एक वैकल्पिक माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और खुशहाल कल के लिए सबसे बड़ी अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में संचालित 'पीएम सूर्य घर योजना' के अंतर्गत उत्तराखंड ने बेहद कम समय में ऐसी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं, जो आज पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन रही हैं। राज्य सरकार की तीव्र कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड ने प्रदेश के लिए निर्धारित 40 हजार रूफटॉप सोलर संयंत्रों का अपना प्रारंभिक और कड़ा लक्ष्य समय-सीमा से काफी पहले ही प्राप्त कर लिया है। वर्तमान में निर्धारित संयंत्रों के कुल लक्ष्य का लगभग 95 प्रतिशत से अधिक कार्य धरातल पर पूर्ण किया जा चुका है। इस प्रभावी क्रियान्वयन के चलते उत्तराखंड आज सौर ऊर्जा को अपनाने वाले देश के शीर्ष राज्यों की अग्रिम पंक्ति (श्रेणी) में मजबूती से खड़ा हो गया है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिजली विभाग और सौर ऊर्जा से जुड़े आंकड़ों का खुलासा करते हुए बताया कि वर्ष 2024 से अब तक, यानी मात्र दो वर्षों के भीतर उत्तराखंड ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 10 गुना की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। राज्य अब तक कुल 290 मेगावाट क्षमता के रेजिडेंशियल (आवासीय) रूफटॉप सोलर संयंत्र सफलतापूर्वक स्थापित करने में कामयाब रहा है। ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में इसे एक युगांतकारी और ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस शानदार कामयाबी के लिए मुख्यमंत्री धामी ने यूपीसीएल, उरेडा, क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारियों तथा इस महाअभियान से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी विभागों और संस्थाओं के समन्वित प्रयासों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अभूतपूर्व सफलता 'टीम उत्तराखंड' की सामूहिक प्रतिबद्धता, दूरदृष्टि और कड़ी मेहनत का ही सुखद परिणाम है। सरकार के विजन को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का अंतिम उद्देश्य केवल सोलर पैनल या संयंत्र स्थापित करना नहीं है, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को इस 'स्वच्छ ऊर्जा क्रांति' का सक्रिय और जागरूक भागीदार बनाना है। सौर ऊर्जा के व्यापक और घरेलू उपयोग से आम नागरिकों के मासिक बिजली बिलों में भारी कमी आएगी। पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होने से कार्बन फुटप्रिंट घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी। राज्य की आने वाली पीढ़ियों को एक प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ, सुरक्षित एवं पूरी तरह से हरित पर्यावरण प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित 'सौर कौथिग' (सोलर मेला), जन-जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटकों और बिजली विभाग के अधिकारियों के लिए चलाए गए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने पूरे प्रदेश में सौर ऊर्जा के अनुकूल एक बेहतरीन वातावरण तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने इस जन-अभियान में उत्कृष्ट तकनीकी सहयोग देने के लिए सीईईडब्ल्यू की टीम की भी विशेष सराहना की। उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में पूरे देश के समक्ष एक आदर्श और प्रेरणादायक मॉडल के रूप में स्थापित होगा।